Thursday, October 22nd, 2026

प्रो. प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे बवाल, कांग्रेस नेता बोले - लोगों को एक विचारधारा के खिलाफ खड़ा होना चाहिए

नई दिल्ली
अशोका यूनिवर्सिटी से दो मशहूर प्रोफेसर के इस्तीफे का मामला काफी सुर्खियों में है। यूनिवर्सिटी से इस्तीफा देने वालों में प्रो. प्रताप भानु मेहता और पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मणयन शामिल हैं। दरअसल, प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे के दो दिन बाद ही उनके समर्थन में देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरविंद सुब्रह्मणयन ने भी इस्तीफा दे दिया।

इस पूरे मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ा जा रहा है। प्रोफेसर्स के इस्तीफे के बाद यहां के स्टूडेंट्स यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के विरोध में उतर गए हैं। यूनिवर्सिटी की बाकि फैकल्टी भी प्रो. मेहता के समर्थन में आ गई है। वहीं, कांग्रेस ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए इसे राजनीति से जोड़ दिया है। आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी इस मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

सवाल : प्रो. प्रताप भानु मेहता के अशोका यूनिवर्सिटी से इस्तीफे की वजह क्या है?
जवाब : दरअसल प्रताप भानु मेहता एक स्तंभकार भी हैं। वह अपने रेगुलर कॉलम में सरकार की नीतियों पर समय-समय पर सवाल उठाते रहते हैं। प्रो. मेहता ने कई मुद्दों पर खुलकर मोदी सरकार की आलोचना भी की है। बताया जा रहा है कि सरकार की नीतियों की आलोचना की वजह से ही उन्होंने इस्तीफा दिया है।

सवाल : प्रो. मेहता ने अपने इस्तीफे में क्या लिखा?
जवाब : प्रताप भानु मेहता ने लिखा, फाउंडर्स से मिलने के बाद ऐसा लगता है कि मेरा यूनिवर्सिटी से जुड़े रहना पॉलिटिकल लायबिलिटी समझा जा सकता है। ऐसे में आजादी और समान अधिकारों वाले संवैधानिक मुद्दों के पक्ष में लिखना विश्वविद्यालय के लिए खतरा हो सकता है।

सवाल : प्रो. प्रताप भानु मेहता अशोका यूनिवर्सिटी से कब जुड़े थे?
जवाब : प्रो. मेहता साल 2017 में कुलपति के रूप में अशोका यूनिवर्सिटी जॉइन किया था। दो साल बाद में उन्होंने कुलपति पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन वह यूनिवर्सिटी से प्रोफेसर के रूप में जुड़े हुए थे। इससे पहले वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, एनवाईयू लॉ स्कूल में ग्लोबल फैकल्टी प्रोग्राम में प्रोफेसर रह चुके हैं। वह सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। मेहता ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र में ग्रेजुएट हैं। उन्होंने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से राजनीति में पीएचडी की है।

सवाल : इस मामले में कांग्रेस का क्या रुख है?
जवाब : कांग्रेस इस पूरे मामले में मोदी सरकार पर आक्रामक हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि यदि यूनिवर्सिटी के दो प्रोफेसर को इस तरह से इस्तीफा देना पड़ता है तो देश में एकेडमिक फ्रीडम के बारे में क्या कहा जाएगा। चिदंबरम ने कहा कि लोगों को ‘एक विचारधारा थोपे जाने’ के खिलाफ खड़े होना चाहिए। उन्होंने लोगों से इससे प्रतिरोध करने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ‘भाजपा की विचारधारा’ भारत को बर्बाद कर देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा की विचारधार इसे तानाशाही में तब्दील कर देगी।

सवाल : इस मामले पर भाजपा ने क्या कहा?
जवाब : भाजपा ने साफ किया है कि सरकार का इस मामले से कोई लेना देना नहीं है। भाजपा नेता विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि यह निजी विश्वविद्यालय का अंदरुनी मामला है। सरकार का इससे दूर-दूर तक लेना देना नहीं है। भाजपा नेता ने कहा कि वो विश्वविद्याल सरकार पोषित संस्थान भी नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार वहां का वीसी भी नियुक्त नहीं करती है।

सवाल : पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मणयन ने इस्तीफे के पीछे क्या वजह बताई?
जवाब : अपने इस्तीफे में प्रो. अरविंद सुब्रह्मणयन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि प्रो. मेहता एक दोस्त ही नहीं एक प्रेरक व्यक्ति भी हैं। उनके इस्तीफे ने मुझे बुरी तरह से हिला दिया है। मैं अशोका यूनिवर्सिटी को चलाने वाले ट्रस्टीज की समस्या को समझ सकता हूं। मुझे अब तक उनसे कोई समस्या नहीं रही। लेकिन प्रताप मेहता जैसे दिग्गजों को अगर यूनिवर्सिटीज छोड़ने का फैसला लेना पड़े तो ये बात डिस्टर्ब करती है। सुब्रमण्यन ने अपने इस्तीफे में यहां तक कहा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी होने और प्राइवेट पूंजी से चलने के बावजूद अशोका अकादमिक अभिव्यक्ति और आजादी के लिए जगह नहीं दिला पाई, जो काफी डिस्टर्ब करने वाला है। सुब्रमण्यन ने पिछले साल जुलाई में डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक्स में बतौर प्रोफेसर जॉइन किया था।

 

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Source : Agency

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